नई सामाजिक व्यवस्था ने जन-विन्यास और जन-संपर्क को बढ़ावा देकर वस्तुओं की मांग को
बढ़ा दिया। अतः अब उत्पादन का काम हाथ से होने के बजाय कारखाना व्यवस्था में
परिवर्तित हो गया। कारखाने के मालिक पूँजी तथा श्रम लगाकर अधिक लाभ कमाने के लिए
बड़े पैमाने पर उत्पादन करने लगे। उद्योग-धंधों के क्षेत्र में विज्ञान,
प्रौद्योगिकी एवं मशीनों का प्रयोग करके बड़े पैमाने पर उत्पादन करने की पद्धति को
औद्योगिक क्रांति कहा गया।
--औद्योगिक क्रांति का शुरूआत
इंग्लैंड ने लोह अयस्क एवं कोयले की खोज करके नई-नई मशीनों का आविष्कार किया और वह
विश्व में औद्योगिक क्रांति का जनक बन गया| इंग्लैंड से औद्योगिक क्रांति यूरोप तथा
विश्व के अन्य देशों तक फैल गई |औद्योगिक क्रांति वाणिज्यवाद की प्रतीक थी, क्योंकि
इसमें बड़े पैमाने पर उत्पादन करने का लक्ष्य अधिक से अधिक धन कमाना था| इंग्लैंड
ने औद्योगिक क्षेत्र की नई - नई मशीनों का उत्पादन करके चीनी अर्थव्यवस्था में
क्रांतिकारी परिवर्तन ला दिए| अर्थव्यवस्था, उद्योग एवं वाणिज्य के क्षेत्र में हुई
इन्हीं क्रांतिकारी परिवर्तनों को औद्योगिक क्रांति कहा गया |
--औद्योगिक क्रांति को जन्म देने वाले कारण
1. उपनिवेशवाद- इंग्लैंड के समान यरोपीय शक्तियों ने उपनिवेशों की स्थापना
कार वहां अपना तैयार माला बेचकर अधिक से अधिक धन कमाने के लिए औद्योगिक क्रांति को
जन्म दिया|
2. नवीन आविष्कार- विज्ञान और शिक्षा की प्रगति के साथ-साथ नई-नई मशीनों के
आविष्कार ने औद्योगिक क्रांति को सफल बनाने में विशेष सहयोग प्रदान किया|
3. कच्चे माल की उपलब्धता- यूरोप की शक्तिशाली देशों ने निर्बल राष्ट्रों
में अपने उपनिवेश स्थापित किया उनसे पर्याप्त कच्चे माल उपलब्ध होने लगे कच्चे माल
की उपयोगिता ने धड़ाधड़ कारखाने खोलने की प्रवृत्ति को प्रोत्साहित कर दिया
4. लोहा और कोयले खोज- इंग्लैंड में लोहा और कोयले की खोज करके नई-नई मशीनों
का निर्माण प्रारंभ हो गया| इन्हीं मशीनों ने उत्पादन की घरेलू पद्धति को कारखाना
पद्धति में बदल दिया|
5. श्रमिकों की सुलभता- यूरोपीय शक्तियों एशिया तथा अफ्रीका के पिछड़े देश
से गुलाब खरीद कर लाती थी जो उनके कारखाने में श्रमिकों के रूप में कार्यकारी
उत्पादन में सहयोग देते थे
6. पर्याप्त पूंजी- उस समय इंग्लैंड के उद्योगपतियों के पास पर्याप्त पूंजी
थी अत: उन्होंने अधिक धन कमाने के लिए कारखाना व्यवस्था को प्रोत्साहित करके
औद्योगिक क्रांति को जन्म दे दिया|
औद्योगिक क्रांति के प्रभाव
विश्व का कोई भी देश औद्योगिक क्रांति के प्रभाव से अछूता नहीं बचा| इस क्रांति की
प्रभावों को निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से समझा जा सकता है - 1. औद्योगिक
क्रांति के कारण नगरीकरण की प्रक्रिया बहुत तीव्र गति से हुई| 2. भौतिकवाद के बढ़ने
से नैतिक मूल्यों का हास्य हुआ तथा जन - सामान्य में चारित्रिक दोष उभरने लगे| 3.
इस काल में पूंजीपति एवं श्रमिक वर्ग बने तथा श्रमिक संगठनों का उदय हुआ| 4.
औद्योगिक क्रांति के नवीनतम मशीनों परिवहन के साधनों एवं कृषि उपकरणों के निर्माण
को विशेष प्रोत्साहन प्रदान किया| 5. मशीनों के निर्माण की प्रक्रिया ने हस्त
शिल्पों का विनाश कर दिया| 6. औद्योगिक क्रांति के कारण पारिवारिक विघटन ने जन्म ले
लिया|
भारत में औद्योगिक क्रांति
सन् 1857 ई० की क्रांति के बाद भारत में लॉर्ड डलहौजी ने प्रशासनिक एवं यातायात की
सुविधाओं का श्री गणेश करके औद्योगिक क्रांति का सूत्रपात किया| भारत में कानपुर,
मुंबई, कोलकाता, सूरत, अहमदाबाद, सोलापुर और नागपुर आदि नगरों में तेजी के साथ
कारखाने की स्थापना हुई रेल एवं सड़क परिवहन के विकास के साथ ही भारत में सूती
वस्त्र, सीमेंट, चीनी एवं लोहा इस्पात उद्योग का विकास तीव्र गति से होता चला गया|
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